स्वच्छ भारत

एक कदम स्वच्छता की और

ताजमहल

नगर के शाहजहांनाबाद में स्थित ताजमहल भवन का निर्माण नवाब शाहजहां बेगम द्वारा वर्ष 1871 में अपने निवास हेतु, राजभवन के रूप में प्रारंभ किया था, जो वर्ष 1884 में पूर्ण हुआ। भवन की तत्कालीन निर्माण लागत 30 लाख रुपये थी। 6 मंजिले इस भवन का आकर्षक प्रवेश द्वार लदाओदार स्वरूप का है, जिसमें मोटर, गाड़ी, घोड़ेजुती बग्घी का प्रवेश आसानी से हो सकता है। भवन में 120 कमरे, 8 विशाल कक्ष (हाल) थे। सभी कक्षों का रंग संयोजन एक दूसरे से पृथक था और रंगों के अनुरूप ही इनकी साज सज्जा और फर्नीचर था। भवन के अंदर लालकिला देहली व शालीमार बाग कश्मीर में बनाई इमारत की नकल सावन भादों बनाई गई थी। भवन निर्माण में विभिन्न प्रकार की मेहराबें, स्तंभों एवं गुम्बजों का प्रयोग हुआ है। भवन पूरा होने पर इसमें 3 वर्ष तक जश्ने ताजमहल मनाया गया था। यह भवन परवर्ती मध्य कालीन समन्वयवादी स्थापत्य का अच्छा उदाहरण है। राज्य शासन द्वारा इस भवन को पुरातत्वीय स्मारक के रूप में संरक्षित किया जा रहा है।

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मुख्यमंत्री कन्यादान योजना

इस योजना का उद्देश्य गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित/निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या/विधवा/ परित्याक्ता के विवाह के लिये आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। यह सहायता सामूहिक विवाह में ही दी जाती है। इसकी शर्त यह है कि कन्या ने विवाह की निर्धारित आयु पूरी कर ली हो। पूर्व में इसके तहत 6500 रूपये की सहायता कन्या की गृहस्थी की व्यवस्था के लिये तथा एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन के खर्चे र्की पूर्ति के लिये दी जाती थी। अब इस राशि को बढ़ाकर दस हजार रूपये कर दिया या है। इसमें नौ हजार रूपये कन्या की गृहस्थी के लिये और एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन खर्च के लिये है।

भारतीय समाज में कन्या के विवाह की चिन्ता हर गरीब परिवार में विशेष रूप से बहुत होती है। उनके पास अपने रोजमर्रा के खर्च की पूर्ति के लिये ही पर्याप्त पैसा नहीं होता , तो वे बेटी की शादी के लिये एक मुश्त खर्च जुटाने के लिये कर्ज का सहारा लेते है या कोई चीज बेचते हैं। गरीब परिवारों को इस समस्या से मुक्ति दिलाने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की विशेष पहल पर यह योजना शुरु की गई। इस योजना में सामूहिक विवाह किये जाते हैं जिससे आपसी सद्भाव भी बढ़ता है और शादियों पर अनावश्यक होने वाले खर्च पर भी रोक लगती है। इसकी एक विशेषता यह भी है कि इसका लाभ सभी समुदायों को मिलता है। ऐसे आयोजनों में हिन्दु और मुसलमान दोनों समुदायों के विवाह एक ही परिसर में होते हैं जिससे सम्प्रदायिक सद्भाव की भावना का विकास होता है।

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