स्वच्छ भारत

एक कदम स्वच्छता की और

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सरदार दोस्त मोहम्मद खान 1708-1726

भोपाल में मुस्लिम रियासत स्थापित करने वाला दोस्त मोहम्मद खान अफगानिस्तान के नगर खैबर के क्षेत्र तीराह से सन् 1696-97 में उत्तरप्रदेश के लाहोरी जलालाबाद के अफगान अमीर जलाल खान के पास आकर रहा। यह अत्यन्त क्रोधी स्वभाव का था। किसी बात पर इनका मनमुटाव जलाल खान के दामाद से हो गया। अतएव उसकी हत्या कर यह करनाल भाग गया पर वहां भी ज्यादा नहीं टिक सका और दिल्ली जाकर मुगल सेना में भर्ती हो गया। जब मराठों के साथ मुगल सेना का युध्द छिड़ा तो वह सन् 1703 में मालवा आ गया।

मालवा में आने पर उसने मुगल साम्राज्य के अधीन सीतामऊ के राजा केशोदास के यहाँ जमातदार के रूप में सेवाएं प्रारम्भ कीं। अपने तमाम हथियार और सामान उसने भेलसा (विदिशा) के शासक मोहम्मद फारूख के पास जमा कर दिए। परन्तु दोनों में बाद में तकरार होने पर चालाकी से उसने मोहम्मद फारूख को मार डाला। इसी समय 1707 ई. में औरंगजेब की मृत्यु होने पर पूरे देश में अफरातफरी का माहौल हो गया। दोस्त मोहम्मद को भी सत्ता स्थापित करने का विचार आया। 1708 ई. में वह फौज की सेवा त्याग कर 50 सवारों की टुकड़ी को साथ लेकर महारानी मंगलगढ़ की सेवा में आ गया। महारानी के देहान्त के बाद उनकी सारी सम्पत्ति इसके पास आ गई। इससे वहां के राजपूत इसके विरोधी हो गये अतएव दोस्त मोहम्मद खान ने बैरसिया आकर काली मस्जिद में शरण ली। उस समय बैरसिया का मुगल सूबेदार 1709 ई. में ताज मोहम्मद था। दोस्त मोहम्मद खान ने उससे बैरसिया छीन लिया जो उसकी सफलता की पहली सीढ़ी साबित हुआ। अब उसका ध्यान राज्य विस्तार की ओर गया। मंगलगढ़ के पास पार्वती तट पर पारासोन नगर था जहां उस समय बखत सिंह राज्य कर रहा था। दोस्त मोहम्मद ने उससे युध्द कर पारासोन पर अधिकार कर खीचीवाड़ा तथा उमटवाड़ा के राजपूतों को परास्त कर बैरसिया के उत्तर में शमशाबाद पर अधिकार कर लिया। यहीं पर उसने अपनी पत्नी एवं बच्चों को अफगानिस्तान से बुला लिया।

1715 ई. में दोस्त मोहम्मद खान ने जगदीशपुर पर आक्रमण किया। उस समय जगदीशपुर चारों तरफ से किले की ऊँची दीवारों से घिरा था। उसका शासक देवड़ा चौहान एक राजपूत सरदार था। दोस्त मोहम्मद ने षड़यंत्र कर उसे बेस नदी के तट पर एक विशाल तम्बू में सहभोज के लिए आमंत्रित किया जैसे ही भोज प्रारम्भ हुआ तभी दोस्त मोहम्मद के सिपाहियों ने तम्बुओं की रस्सियाँ काट दीं एवं निहत्थे राजपूतों को हलालकर बेस नदी में फेंक दिया। बेस नदी रक्त रंजित हो गई इसलिए इसका नाम हलाली नदी पड़ा। इस प्रकार दोस्त मोहम्मद ने जगदीशपुर दुर्ग जीत कर इसका नाम इस्लामनगर रखा। इस प्रकार दोस्त मोहम्मद खान ने 1719 ई. तक सम्पूर्ण भोपाल क्षेत्र को अपने अधीन कर लिया।

इस विजय के पश्चात् उसने दक्षिणी परगनों महलपुर, ग्यारसपुर, इछावर और दोराहे पर आसानी से विजय प्राप्त की। फिर आष्टा, शुजालपुर, भोजपुर एवं सांची को भी अपने अधीन कर लिया। दिल्ली के बादशाह फर्रुख सियर की सेवा में लूट का माल भेजा तो वहाँ से इन्हें दिलेर जंग एवं खान का खिताब मिला।

1720 ई. में भोपाल पर जब यह भूभाग सरदार दोस्त मोहम्मद खाँ के आधिपत्य में आ गया और उसके बाद उसका अधिकार गिन्नौरगढ़ के किले पर हो गया। भोपाल के तालाब और यहां के प्राकृतिक सौंदर्य पर वह मुग्ध था। उसने भोज द्वारा निर्मित छोटे किले के निकट सन् 1722 ई. में भोपाल के बड़े तालाब के किनारे अपनी पत्नी फतेह बीबी के नाम पर किला फतेहगढ़ की नींव रखी तथा 1726 ई. में यह बनकर पूरा हुआ। किले की चहार दीवारी में एक बस्ती को बसाया और स्वयं भी उसमें रहने लगा, शनै: शनै: यह बस्ती बढ़ते बढ़ते भोपाल शहर बन गई। वर्ष 1726 ई. में उसका देहान्त हो गया एवं किला फतेहगढ़ की मस्जिद में उसे दफन किया गया। यहीं उसकी पत्नी फतेह बीबी भी दफन की गई।

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लाड़ली लक्ष्मी योजना

वर्ष 2006 से लागू की गई इस योजना का उद्देश्य बालिकाओं के शैक्षिक और आर्थिक स्तर में सुधार लाकर उनके अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने के साथ-साथ कन्या जन्म के प्रति समाज के दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। योजना के तहत बालिका के जन्म के बाद उसके पक्ष में प्रति वर्ष छः हजार रूपये के राष्ट्रीय विकास पत्र पांच वर्ष तक शासन द्वारा क्रय किये जाते हैं। इस प्रकार यह राशि तीस हजार रूपये होती है। बालिका के कक्षा छठवीं में प्रवेश पर उसे दो हजार रूपये , नौवी में प्रवेश पर चार हजार रूपये , ग्यारहवीं में प्रवेश पर 7500 रूपये तथा ग्यारहवीं और बाहरवीं की पढ़ाई के समय दो वर्ष तक दौ सौ रूपये प्रतिमाह दिये जाते हैं। बालिका के 21 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर एवं 18 वर्ष के पूर्व विवाह न करने तथा बारहवीं कक्षा की परीक्षा में सम्मिलित होने पर एक मुश्त राशि का भुगतान किया जायेगा। यह राशि एक लाख रूपये होती है।

योजना के तहत एक जनवरी 2006 के पश्चात जन्म लेने वाली बालिकाओं को , जिनके माता पिता ने दो जीवित बच्चों के रहते हुए परिवार नियोजन अपना लिया हो तथा जो आंगनवाड़ी केन्द्रों में पंजीकृत हो तथा आयकर दाता न हो , उन्हें इसका लाभ मिलता है।

इस योजना के क्रियान्वयन से कन्या जन्म को लेकर समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव आने लगा है। कन्या जन्म को अभिशाप मानने की प्रवृत्ति में कमी आ रही है और उसे बोझ मानने की मानसिकता भी बदल रही है। साथ ही बालिका शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ा है और बाल विवाह की प्रवृत्ति पर भी इससे प्रभवी अंकुश लग रहा है।

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मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना

मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना प्रदेश के 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को उनके जीवन काल में एक बार प्रदेश के बाहर के निर्धारित तीर्थ-स्थानों में से किसी एक स्थान की यात्रा के लिए राज्य सरकार सहायता देती है। प्रथमतः आई.आर.सी.टी.सी. (रेलवे) के पैकेज के अनुसार यात्रियों को भेजा जाएगा। योजना 3 सितम्बर 2012 को रामेश्वरम् की यात्रा के साथ प्रारंभ हुई।

तीर्थ दर्शन योजना में राज्य शासन ने वर्तमान में श्री बद्रीनाथ, श्री केदारनाथ, श्री जगन्नाथपुरी, श्री द्वारकापुरी, हरिद्वार, अमरनाथ, वैष्णोदेवी, शिरडी, तिरूपति, अजमेर शरीफ, काशी, गया, अमृतसर, रामेश्वरम, सम्मेद शिखर, श्रवण बेलगोला और बेलांगणी चर्च, नागापट्टनम तीर्थ को शामिल किया है।

मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना

गरीब परिवारों को महँगाई की मार से राहत देने के उद्देश्य से अप्रैल 2008 से शुरू की गई मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना को नया स्वरूप दिया गया है। जून 2013 से लागू नये स्वरूप में गेहूँ और चावल की रियायती दर को और कम कर दिया है तथा आयोडीनयुक्त नमक और शक्कर को इसमें शामिल किया गया है। वर्तमान में लगभग 18 लाख अंत्योदय और 56 लाख बीपीएल परिवारों को मिलाकर प्रति परिवार पाँच सदस्य के मान से करीब 3.5 लाख लोगों अर्थात् प्रदेश की आधी आबादी नये स्वरूप में गेहूँ एक रुपये किलो तथा चावल 2 रुपये किलो के मूल्य पर उपलब्ध करवाया जा रहा है। पूरे प्रदेश में साथ ही एक रुपये किलो की दर से आयोडीनयुक्त नमक भी दिया जा रहा है। इसके अलावा सरकार ने इन परिवारों को रियायती दर पर साढ़े तेरह रुपये किलो के हिसाब से दी जाने वाली शक्कर की आपूर्ति को जारी रखने का निर्णय लिया है।

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मुख्यमंत्री कन्यादान योजना

इस योजना का उद्देश्य गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित/निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या/विधवा/ परित्याक्ता के विवाह के लिये आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। यह सहायता सामूहिक विवाह में ही दी जाती है। इसकी शर्त यह है कि कन्या ने विवाह की निर्धारित आयु पूरी कर ली हो। पूर्व में इसके तहत 6500 रूपये की सहायता कन्या की गृहस्थी की व्यवस्था के लिये तथा एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन के खर्चे र्की पूर्ति के लिये दी जाती थी। अब इस राशि को बढ़ाकर दस हजार रूपये कर दिया या है। इसमें नौ हजार रूपये कन्या की गृहस्थी के लिये और एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन खर्च के लिये है।

भारतीय समाज में कन्या के विवाह की चिन्ता हर गरीब परिवार में विशेष रूप से बहुत होती है। उनके पास अपने रोजमर्रा के खर्च की पूर्ति के लिये ही पर्याप्त पैसा नहीं होता , तो वे बेटी की शादी के लिये एक मुश्त खर्च जुटाने के लिये कर्ज का सहारा लेते है या कोई चीज बेचते हैं। गरीब परिवारों को इस समस्या से मुक्ति दिलाने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की विशेष पहल पर यह योजना शुरु की गई। इस योजना में सामूहिक विवाह किये जाते हैं जिससे आपसी सद्भाव भी बढ़ता है और शादियों पर अनावश्यक होने वाले खर्च पर भी रोक लगती है। इसकी एक विशेषता यह भी है कि इसका लाभ सभी समुदायों को मिलता है। ऐसे आयोजनों में हिन्दु और मुसलमान दोनों समुदायों के विवाह एक ही परिसर में होते हैं जिससे सम्प्रदायिक सद्भाव की भावना का विकास होता है।

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