स्वच्छ भारत

एक कदम स्वच्छता की और

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नवाब सुल्तान जहाँ बेगम 1901-1926

नवाब शाहजहां बेगम की बेटी सुल्तान जहां बेगम 4 जुलाई, 1901 ई. को शासक हुई। उसकी शादी जलालाबाद उत्तरप्रदेश के अहमद अली खान के साथ हुई थी। सुल्तान जहां के शासक बन जाने के एक साल बाद 4 जनवरी, 1902 ई. को उसके पति का देहांत हो गया।

सुल्तान जहां बेगम के राज्य काल में 1912 ई. में प्लेग की बीमारी फैली, रियासत 16 हिस्सों में बंटी, 17 फरवरी, 1903 ई. को पहला गजट छपा तथा 1904 ई. में नवाब सुल्तान जहां हज के सफर पर गयी। दिसम्बर 1910 ई. में इलाहाबाद गईं और प्रिंस आगा खां को मोहम्मद यूनिवर्सिटी के लिये एक लाख रुपये चंदा दिया। 1915 ई. में अलीगढ़ कन्या स्कूल का उद्धाटन किया। अलीगढ़ में ही सुल्तान जहां मंजिल बनवायी।

जब अलीगढ़ विश्वविद्यालय बना तो उसकी प्रथम चान्सलर (कुलपति) हुई। सुल्तान जहां बेगम को शिक्षा से बड़ा लगाव था। उसने कई किताबें भी लिखीं जिनमें तुजके सुल्तानी, गौहर इकबाल, अख्तर इकबाल, हयाते कुदसी, हयाते शाहजहांनी, खुतवाते सुल्तानी, तजकराबाकी, हयाते सिकन्दरी, फलसफाये अखलाक, बागे अजब, हिदायते तीमारदारी एवं उमरे खानदानी आदि शामिल हैं।

नवाब सुल्तान जहां बेगम द्वारा सदर मंजिल, बाग फरहत अफजा, जियाउद्दीन टेकरी पर अहमदाबाद पैलेस (कसरे सुल्तानी) आदि का निर्माण कराया। शाहजहांनाबाद और अहमदाबाद के बीच जनरल कोर्ट, रेवेन्यू कोर्ट, 1913 ई. में हमीदिया लाइब्रेरी, पुराने किले के पास चार बंगले तथा लार्ड मिन्टो के नाम पर मिंटो हाल तथा लाल पत्थरों की एडवर्ड म्यूजियम नामक इमारत बनवाई। इसके अलावा कारखाने, पंचायतें और तहसीलें बनायी गई। मालगुजारी खत्म करके रईयतवारी का निजाम कायम किया। नवाब सुल्तान जहां बेगम ने 4 फरवरी, 1922 को प्रिंस आफ वेल्स के भोपाल आने पर रियासत के लिये एक नया कानून लागू किया जिसके तहत एक्जीक्यूटिव कौंसिल एवं लेजिसलेटिव कौंसिल बनी। बाकायदा चुनाव कराने के लिये जनप्रतिनिधि चुने गये।

1921 ई. में हमीदुल्ला खान द्वारा रियासत के चीफ सेक्रेट्री के रूप में दिये गये सुझाव पर रियासत में शराब बंदी लागू की गई। 1922 ई. में भोपाल में केमिकल लेबोरेट्री भी स्थापित हुई।

सुल्तान जहां बेगम के 3 लड़के कर्नल नसरुल्लाह खां, जनरल उबैद उल्लाह खां और हमीदुल्ला खां तथा दो बेटियां आसिफ जहां एवं बिल्कीस जहां थीं। दोनों बेटियों का बचपन में निधन हो गया। सन् 1924 ई. में उबैदउल्लाह खां एवं नसरुल्लाह खां का एक के बाद दूसरे का निधन हो गयी। सुल्तान जहां बेगम हुकूमत का इन्तजाम अपने जीवन काल में ही छोटे बेटे हमीदुल्लाह खां को सुपुर्द करने के सिलसिले में इंग्लैंड गईं और 1924 ई. इस पर अंग्रेजी सरकार की स्वीकृति लेकर आईं एवं 1926 ई. में गद्दी छोड़ दी व हमीदुल्लाह को नवाब बनाया। लीवर के आपरेशन के बाद वर्ष 1930 ई. में नवाब सुल्तान जहां बेगम का निधन हो गया।

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लाड़ली लक्ष्मी योजना

वर्ष 2006 से लागू की गई इस योजना का उद्देश्य बालिकाओं के शैक्षिक और आर्थिक स्तर में सुधार लाकर उनके अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने के साथ-साथ कन्या जन्म के प्रति समाज के दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। योजना के तहत बालिका के जन्म के बाद उसके पक्ष में प्रति वर्ष छः हजार रूपये के राष्ट्रीय विकास पत्र पांच वर्ष तक शासन द्वारा क्रय किये जाते हैं। इस प्रकार यह राशि तीस हजार रूपये होती है। बालिका के कक्षा छठवीं में प्रवेश पर उसे दो हजार रूपये , नौवी में प्रवेश पर चार हजार रूपये , ग्यारहवीं में प्रवेश पर 7500 रूपये तथा ग्यारहवीं और बाहरवीं की पढ़ाई के समय दो वर्ष तक दौ सौ रूपये प्रतिमाह दिये जाते हैं। बालिका के 21 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर एवं 18 वर्ष के पूर्व विवाह न करने तथा बारहवीं कक्षा की परीक्षा में सम्मिलित होने पर एक मुश्त राशि का भुगतान किया जायेगा। यह राशि एक लाख रूपये होती है।

योजना के तहत एक जनवरी 2006 के पश्चात जन्म लेने वाली बालिकाओं को , जिनके माता पिता ने दो जीवित बच्चों के रहते हुए परिवार नियोजन अपना लिया हो तथा जो आंगनवाड़ी केन्द्रों में पंजीकृत हो तथा आयकर दाता न हो , उन्हें इसका लाभ मिलता है।

इस योजना के क्रियान्वयन से कन्या जन्म को लेकर समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव आने लगा है। कन्या जन्म को अभिशाप मानने की प्रवृत्ति में कमी आ रही है और उसे बोझ मानने की मानसिकता भी बदल रही है। साथ ही बालिका शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ा है और बाल विवाह की प्रवृत्ति पर भी इससे प्रभवी अंकुश लग रहा है।

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मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना

मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना प्रदेश के 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को उनके जीवन काल में एक बार प्रदेश के बाहर के निर्धारित तीर्थ-स्थानों में से किसी एक स्थान की यात्रा के लिए राज्य सरकार सहायता देती है। प्रथमतः आई.आर.सी.टी.सी. (रेलवे) के पैकेज के अनुसार यात्रियों को भेजा जाएगा। योजना 3 सितम्बर 2012 को रामेश्वरम् की यात्रा के साथ प्रारंभ हुई।

तीर्थ दर्शन योजना में राज्य शासन ने वर्तमान में श्री बद्रीनाथ, श्री केदारनाथ, श्री जगन्नाथपुरी, श्री द्वारकापुरी, हरिद्वार, अमरनाथ, वैष्णोदेवी, शिरडी, तिरूपति, अजमेर शरीफ, काशी, गया, अमृतसर, रामेश्वरम, सम्मेद शिखर, श्रवण बेलगोला और बेलांगणी चर्च, नागापट्टनम तीर्थ को शामिल किया है।

मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना

गरीब परिवारों को महँगाई की मार से राहत देने के उद्देश्य से अप्रैल 2008 से शुरू की गई मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना को नया स्वरूप दिया गया है। जून 2013 से लागू नये स्वरूप में गेहूँ और चावल की रियायती दर को और कम कर दिया है तथा आयोडीनयुक्त नमक और शक्कर को इसमें शामिल किया गया है। वर्तमान में लगभग 18 लाख अंत्योदय और 56 लाख बीपीएल परिवारों को मिलाकर प्रति परिवार पाँच सदस्य के मान से करीब 3.5 लाख लोगों अर्थात् प्रदेश की आधी आबादी नये स्वरूप में गेहूँ एक रुपये किलो तथा चावल 2 रुपये किलो के मूल्य पर उपलब्ध करवाया जा रहा है। पूरे प्रदेश में साथ ही एक रुपये किलो की दर से आयोडीनयुक्त नमक भी दिया जा रहा है। इसके अलावा सरकार ने इन परिवारों को रियायती दर पर साढ़े तेरह रुपये किलो के हिसाब से दी जाने वाली शक्कर की आपूर्ति को जारी रखने का निर्णय लिया है।

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मुख्यमंत्री कन्यादान योजना

इस योजना का उद्देश्य गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित/निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या/विधवा/ परित्याक्ता के विवाह के लिये आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। यह सहायता सामूहिक विवाह में ही दी जाती है। इसकी शर्त यह है कि कन्या ने विवाह की निर्धारित आयु पूरी कर ली हो। पूर्व में इसके तहत 6500 रूपये की सहायता कन्या की गृहस्थी की व्यवस्था के लिये तथा एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन के खर्चे र्की पूर्ति के लिये दी जाती थी। अब इस राशि को बढ़ाकर दस हजार रूपये कर दिया या है। इसमें नौ हजार रूपये कन्या की गृहस्थी के लिये और एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन खर्च के लिये है।

भारतीय समाज में कन्या के विवाह की चिन्ता हर गरीब परिवार में विशेष रूप से बहुत होती है। उनके पास अपने रोजमर्रा के खर्च की पूर्ति के लिये ही पर्याप्त पैसा नहीं होता , तो वे बेटी की शादी के लिये एक मुश्त खर्च जुटाने के लिये कर्ज का सहारा लेते है या कोई चीज बेचते हैं। गरीब परिवारों को इस समस्या से मुक्ति दिलाने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की विशेष पहल पर यह योजना शुरु की गई। इस योजना में सामूहिक विवाह किये जाते हैं जिससे आपसी सद्भाव भी बढ़ता है और शादियों पर अनावश्यक होने वाले खर्च पर भी रोक लगती है। इसकी एक विशेषता यह भी है कि इसका लाभ सभी समुदायों को मिलता है। ऐसे आयोजनों में हिन्दु और मुसलमान दोनों समुदायों के विवाह एक ही परिसर में होते हैं जिससे सम्प्रदायिक सद्भाव की भावना का विकास होता है।

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