स्वच्छ भारत

एक कदम स्वच्छता की और

नवाब शाहजहाँ बेगम 1868-1901

नवाब सिकन्दर जहां बेगम के देहांत के बाद उसकी बेटी शाहजहां बेगम भोपाल रियासत की नवाब हुई। शाहजहां बेगम की शादी उनके नवाब बनने के पहले बाकी मोहम्मद खान से हुई थी। शाहजहां बेगम के सत्तासीन होने के एक वर्ष पहले 1867 ई. में बाकी मोहम्मद खान का निधन हो गया था। उसकी बेटी सुल्तान जहां बेगम पैदा हुई थीं।

शाहजहां बेगम ने पोलीटिकल एजेन्ट एवं अंग्रेज सरकार की स्वीकृति से दूसरी शादी 8 मई, 1871 ई. को सैय्यद सिद्दीक हसन खान से की, जो सिकन्दर जहां बेगम के जमाने में उ.प्र. से आकर नवाब सिकन्दर जहां के महल में नौकरी कर चुके थे और इसी दौरान शाहजहां बेगम के संपर्क में आये व ये संबंध शादी में बदल गया। शादी के बाद सिद्दीक हसन खान को नबाव वालाजाह अमीरूल मुल्क का खिताब एवं 14 तोपों की सलामी की स्वीकृति गवर्नर जनरल द्वारा दी गई।

सुल्तान जहां बेगम शाहजहां बेगम की दूसरी शादी से बहुत नाराज थीं। इस कारण मां-बेटी के संबंध बहुत कटु हो गये व सुल्तान जहां बेगम अलग रहने लगीं।

शाहजहां बेगम के राज्यकाल में फौज, अदालत, पुलिस, वित्त एवं राजस्व विभाग अलग-अलग कर दिये गये। बेगम ने 16 नवम्बर 1868 ई. को मोती महल का दरबार सम्हाला। अपनी ताजपोशी के बाद उसने पूरे भोपाल की साज सम्हाल की ओर ध्यान लगाया। शाहजहां बेगम ने पूरी रियासत का दौरा किया तथा कई सुधार कार्य किये। 1882 ई. में डाक व्यवस्था हुई। तोपखानों में बैलों के स्थान पर घोड़ों का इस्तेमाल शुरू किया। हर मुहल्ले में चिकित्सक की पदस्थापना की। 1876 ई. में फौजदारी, दीवानी, कानून बनाकर प्रकाशित कराये। होशंगाबाद से भोपाल तक रेल जारी करने के लिये पाँच लाख खर्च किये। भोपाल उज्जैन रेलवे लाइन 1896 ई. में जारी कराई। 1878 ई. में मदरसा डयूक आफ एडिनबरा तथा प्रिंस आफ वेल्स अस्पताल बनवाये। 1894 ई. में लेडी लेंस डाउन मेटरनिटी अस्पताल शुरू कराया। शाहजहां बेगम को भवनों के निर्माण का बहुत शौक था। उसने इंग्लैंड में भी एक मस्जिद बनवाई। भोपाल में शाहजहांनाबाद मोहल्ला बसाया। ताजमहल, नूर मस्जिद, बेनजीर मंजिल, नूर महल, निशात मंजिल, नवाब मंजिल, आली मंजिल, ताजुल मसाजिद बनवायीं। पहाड़ी पर जेलखाना तथा पोलीटिकल एजेन्ट के रहने के लिये लाल कोठी बनवाई। नवाब जहांगीर मोहम्मद खान और सिकन्दर बेगम के मकबरे बनवाये।

नवाब सिकन्दर जहां बेगम ने खजाने तोशाखाना के जेवरात जिनकी कीमत रुपये 72955/- अदा नहीं की गई थी, उन्हें शाहजहां बेगम ने नवाब बनते ही वापस कर दिये। साथ ही निजी जायदाद पर बकाया रु. 5,52,752/- भी भुगतान करके रियासत के खजाने और वित्तीय स्थिति पर नियंत्रण किया।

शाहजहां बेगम ने अपने कार्यकाल में पहले से जारी तांबे के सिक्के बंद करके चांदी के सिक्के जारी किये। शाहजहां बेगम के काल में तीन छापाखाना खोले गये-

  1. सिकन्दर प्रेस- इस छापा खाना में सरकारी प्रयोग में लाये जाने वाले फार्म छपते थे।
  2. सुल्तानियां प्रेस- इसमें ज्यूडिशियल स्टाम्प एवं टिकिट छपते थे।
  3. शाहजहां प्रेस- यहाँ स्कूल की किताबें और अखबारों का कागज काटा जाता था।

नवाब शाहजहां बेगम को 1872 ई. में जी.सी.एस.आई. का खिताब दिल्ली में दिया गया। शाहजहां बेगम के कार्यकाल में लार्ड लेंसडाउन, लार्ड एल्गिन एवं लार्ड कर्जन भोपाल आये। नवाब शाहजहां बेगम का 14 जून, 1901 ई. को कैंसर की बीमारी से निधन हो गया।

NEWS
मुख्यमंत्री कन्यादान योजना

इस योजना का उद्देश्य गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित/निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या/विधवा/ परित्याक्ता के विवाह के लिये आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। यह सहायता सामूहिक विवाह में ही दी जाती है। इसकी शर्त यह है कि कन्या ने विवाह की निर्धारित आयु पूरी कर ली हो। पूर्व में इसके तहत 6500 रूपये की सहायता कन्या की गृहस्थी की व्यवस्था के लिये तथा एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन के खर्चे र्की पूर्ति के लिये दी जाती थी। अब इस राशि को बढ़ाकर दस हजार रूपये कर दिया या है। इसमें नौ हजार रूपये कन्या की गृहस्थी के लिये और एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन खर्च के लिये है।

भारतीय समाज में कन्या के विवाह की चिन्ता हर गरीब परिवार में विशेष रूप से बहुत होती है। उनके पास अपने रोजमर्रा के खर्च की पूर्ति के लिये ही पर्याप्त पैसा नहीं होता , तो वे बेटी की शादी के लिये एक मुश्त खर्च जुटाने के लिये कर्ज का सहारा लेते है या कोई चीज बेचते हैं। गरीब परिवारों को इस समस्या से मुक्ति दिलाने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की विशेष पहल पर यह योजना शुरु की गई। इस योजना में सामूहिक विवाह किये जाते हैं जिससे आपसी सद्भाव भी बढ़ता है और शादियों पर अनावश्यक होने वाले खर्च पर भी रोक लगती है। इसकी एक विशेषता यह भी है कि इसका लाभ सभी समुदायों को मिलता है। ऐसे आयोजनों में हिन्दु और मुसलमान दोनों समुदायों के विवाह एक ही परिसर में होते हैं जिससे सम्प्रदायिक सद्भाव की भावना का विकास होता है।

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