स्वच्छ भारत

एक कदम स्वच्छता की और

नवाब जहांगीर मोहम्मद खान 1837-1844

जहांगीर मोहम्मद खान 30 नवम्बर 1837 को शासक बने। उन्होंने अपने मामा नवाब असद अली खान को रियासत का दीवान तथा अपने समर्थकों को बड़ी-बड़ी जागीरें देकर ऊँचे पदों पर रखा। उनकी बेगम सिकन्दर जहां के सलाहकार अलग थे। पहले पति पत्नी के संबंध अच्छे थे पर बाद में काफी कटु हो गये थे बल्कि एक बार जहांगीर मोहम्मद खान ने सिकन्दर जहां का कत्ल करने की कोशिश भी की थी और तलवार से कई वार भी किये थे। इसके बाद सिकन्दर जहां बेगम एवं उसकी माँ कुदसिया बेगम भोपाल छोड़कर इस्लामनगर किले में रहने लगीं जहाँ सिकन्दर जहां बेगम ने शाहजहां बेगम को जन्म दिया। सिकन्दर जहां बेगम अपनी माँ एवं बेटी के साथ 1844 ई. तक इस्लामनगर में रहीं। सिकन्दर जहां के परिचित अक्सर भोपाल नगर एवं महल में आते जाते थे जिनसे जहांगीर मोहम्मद खान को बेटी पैदा होने की जानकारी मिली। कभी-कभी सिकन्दर जहां बेगम एवं जहांगीर मोहम्मद खां मिलने भी लगे थे।

जहांगीर मोहम्मद खान शतरंज के खेल में दक्ष थे और 9 दिसम्बर, 1844 ई. में जहांगीर मोहम्मद खान का देहान्त हो गया।

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मुख्यमंत्री कन्यादान योजना

इस योजना का उद्देश्य गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित/निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या/विधवा/ परित्याक्ता के विवाह के लिये आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। यह सहायता सामूहिक विवाह में ही दी जाती है। इसकी शर्त यह है कि कन्या ने विवाह की निर्धारित आयु पूरी कर ली हो। पूर्व में इसके तहत 6500 रूपये की सहायता कन्या की गृहस्थी की व्यवस्था के लिये तथा एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन के खर्चे र्की पूर्ति के लिये दी जाती थी। अब इस राशि को बढ़ाकर दस हजार रूपये कर दिया या है। इसमें नौ हजार रूपये कन्या की गृहस्थी के लिये और एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन खर्च के लिये है।

भारतीय समाज में कन्या के विवाह की चिन्ता हर गरीब परिवार में विशेष रूप से बहुत होती है। उनके पास अपने रोजमर्रा के खर्च की पूर्ति के लिये ही पर्याप्त पैसा नहीं होता , तो वे बेटी की शादी के लिये एक मुश्त खर्च जुटाने के लिये कर्ज का सहारा लेते है या कोई चीज बेचते हैं। गरीब परिवारों को इस समस्या से मुक्ति दिलाने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की विशेष पहल पर यह योजना शुरु की गई। इस योजना में सामूहिक विवाह किये जाते हैं जिससे आपसी सद्भाव भी बढ़ता है और शादियों पर अनावश्यक होने वाले खर्च पर भी रोक लगती है। इसकी एक विशेषता यह भी है कि इसका लाभ सभी समुदायों को मिलता है। ऐसे आयोजनों में हिन्दु और मुसलमान दोनों समुदायों के विवाह एक ही परिसर में होते हैं जिससे सम्प्रदायिक सद्भाव की भावना का विकास होता है।

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