स्वच्छ भारत

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नवाब हमीदुल्लाह खान 1926-1949

भोपाल रियासत के आखिरी नवाब हमीदउल्ला खान थे। वह सन् 1894 में पैदा हुये। इसके पहले तमाम बेगमों के हमेशा लड़कियाँ पैदा होती रहीं। सुल्तान जहां बेगम शुरू से ही हमीदुल्ला से ज्यादा प्यार करती थीं एवं रियासत के कार्यों में उन्हें शामिल किया करती थीं। सुल्तान जहां ने 16 अप्रैल, 1916 ई. को हमीदउल्ला खान को रियासत का चीफ सेक्रेट्री बना दिया था। इनके दोनों बड़े भाई रियासत के उत्तराधिकार के लिये दावेदारी करने लगे थे। नवाब सुल्तान जहां बेगम ने अपने जीवनकाल में ही हमीदउल्ला खान को 16 मई, 1926 ई. को रियासत का शासक बनाये जाने की घोषणा की एवं 9 जून, 1926 ई. को ये शासक बने।

नवाब हमीदउल्ला खान की पहली शादी मात्र 11 वर्ष की उम्र में 6 दिसम्बर, 1905 ई. को पेशावर में शहजादा हुमायूं की बेटी मैमूना सुल्तान से हुई जिनसे 3 पुत्रियां हुईं। आबिदा सुल्तान जिनकी शादी नवाब कुरबाई से, साजिदा सुल्तान जिनकी शादी नवाब इफ्तेखार अली खां पटौदी से और राबिया सुल्तान जिनकी शादी पहले नवाब के भतीजे रशीदुज्जफर खान से हुई पर सफल नहीं हुई फिर आगा नादिर मिर्जा से हुई। नवाब हमीदउल्ला ने दूसरी शादी सन् 1947 ई. भोपाल में की थी जिससे कोई संतान नहीं हुई।

नवाब हमीदउल्ला खान बहुत पढ़े लिखे एवं बेहतरीन हुक्मरान थे। शासक होने पर उन्होंने सभी विभागों के अलग-अलग मंत्री बनाये। भोपाल में 1931 ई. में बिजली महकमा, 1934 ई. में माचिस फैक्ट्री एवं 1937 ई. में टेक्सटाइल मिल एवं सीहोर में शुगर फैक्ट्री लगवाई। करबला और याट क्लब विद्युत शक्ति वाले जल आपूर्ति के पम्प लगाये गये। कार्ड बोर्ड फैक्ट्री, ग्राउन्ड ट्रक टेलीफोन स्टेशन एवं बैरागढ़ में हवाई अड्डे की तामीर कराई। नवाब भोपाल ने अहमदाबाद में राहत मंजिल, चिकलौद कोठी और अहमदाबाद में ही सूफिया मस्जिद बनवाई। नवाब साहब सन् 1930 से 1947 ई. तक अलीगढ़ विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे। नवाब हमीद उल्ला खान के संबंध उस समय के मशहूर व्यक्तियों गांधी जी, जिन्ना, सरोजिनी नायडू, नेहरू जी, डॉ. अंसारी आदि से थे।

नवाब हमीदउल्ला खान हिन्दुस्तान की देशी रियासतों के हुक्मरानों की कमेटी, जो चेम्बर आफ प्रिंसेस कहलाती थी, के चान्सलर बने और इसी हैसियत से 1930 ई. में लंदन में हुई गोलमेज कांफ्रेंस और 1931 ई. में दूसरी कांफ्रेंस में भाग लिया। सन् 1947 ई. में नवाब ने एक नामजद मंत्रिमंडल का गठन किया जिसमें राजा अवधनारायण बिसारिया प्रधानमंत्री, के.एफ. हैदर वित्त मंत्री, मुजफ्फर अली खां खाद्य मंत्री, सईद उल्ला खां रज्मी स्वास्थ्य व शिक्षा मंत्री एवं भैरों प्रसाद लोक निर्माण मंत्री बनाये गये।

इस मंत्रिमंडल के गठन के बाद मार्च, 1948 ई. में नवाब हमीद उल्ला ने भोपाल को एक अलग रियासत का स्वरूप प्रदान करने की दृष्टि से मालगुजारी माफी का ऐलान किया जिसका भारी विरोध हुआ तथा मंत्रिमंडल का नया गठन हुआ।

अक्टूबर 1948 नवाब हमीदउल्ला खान हज को गये एवं शासन के अधिकार अपने चुनिंदा मंत्रियों को दे गये।

आजादी मिलने के बाद सन् 1949 में ही रियासत भोपाल के कुछ राजनीतिज्ञों ने रियासत को भारतीय हुकूमत में विलय करने के लिये आंदोलन शुरू कर दिया। आखिरकार नवाब हमीदउल्ला खान ने भोपाल रियासत को भारतीय संघ में 1 जून 1949 ई. को विलय कर दिया।

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लाड़ली लक्ष्मी योजना

वर्ष 2006 से लागू की गई इस योजना का उद्देश्य बालिकाओं के शैक्षिक और आर्थिक स्तर में सुधार लाकर उनके अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने के साथ-साथ कन्या जन्म के प्रति समाज के दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। योजना के तहत बालिका के जन्म के बाद उसके पक्ष में प्रति वर्ष छः हजार रूपये के राष्ट्रीय विकास पत्र पांच वर्ष तक शासन द्वारा क्रय किये जाते हैं। इस प्रकार यह राशि तीस हजार रूपये होती है। बालिका के कक्षा छठवीं में प्रवेश पर उसे दो हजार रूपये , नौवी में प्रवेश पर चार हजार रूपये , ग्यारहवीं में प्रवेश पर 7500 रूपये तथा ग्यारहवीं और बाहरवीं की पढ़ाई के समय दो वर्ष तक दौ सौ रूपये प्रतिमाह दिये जाते हैं। बालिका के 21 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर एवं 18 वर्ष के पूर्व विवाह न करने तथा बारहवीं कक्षा की परीक्षा में सम्मिलित होने पर एक मुश्त राशि का भुगतान किया जायेगा। यह राशि एक लाख रूपये होती है।

योजना के तहत एक जनवरी 2006 के पश्चात जन्म लेने वाली बालिकाओं को , जिनके माता पिता ने दो जीवित बच्चों के रहते हुए परिवार नियोजन अपना लिया हो तथा जो आंगनवाड़ी केन्द्रों में पंजीकृत हो तथा आयकर दाता न हो , उन्हें इसका लाभ मिलता है।

इस योजना के क्रियान्वयन से कन्या जन्म को लेकर समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव आने लगा है। कन्या जन्म को अभिशाप मानने की प्रवृत्ति में कमी आ रही है और उसे बोझ मानने की मानसिकता भी बदल रही है। साथ ही बालिका शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ा है और बाल विवाह की प्रवृत्ति पर भी इससे प्रभवी अंकुश लग रहा है।

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मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना

मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना प्रदेश के 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को उनके जीवन काल में एक बार प्रदेश के बाहर के निर्धारित तीर्थ-स्थानों में से किसी एक स्थान की यात्रा के लिए राज्य सरकार सहायता देती है। प्रथमतः आई.आर.सी.टी.सी. (रेलवे) के पैकेज के अनुसार यात्रियों को भेजा जाएगा। योजना 3 सितम्बर 2012 को रामेश्वरम् की यात्रा के साथ प्रारंभ हुई।

तीर्थ दर्शन योजना में राज्य शासन ने वर्तमान में श्री बद्रीनाथ, श्री केदारनाथ, श्री जगन्नाथपुरी, श्री द्वारकापुरी, हरिद्वार, अमरनाथ, वैष्णोदेवी, शिरडी, तिरूपति, अजमेर शरीफ, काशी, गया, अमृतसर, रामेश्वरम, सम्मेद शिखर, श्रवण बेलगोला और बेलांगणी चर्च, नागापट्टनम तीर्थ को शामिल किया है।

मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना

गरीब परिवारों को महँगाई की मार से राहत देने के उद्देश्य से अप्रैल 2008 से शुरू की गई मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना को नया स्वरूप दिया गया है। जून 2013 से लागू नये स्वरूप में गेहूँ और चावल की रियायती दर को और कम कर दिया है तथा आयोडीनयुक्त नमक और शक्कर को इसमें शामिल किया गया है। वर्तमान में लगभग 18 लाख अंत्योदय और 56 लाख बीपीएल परिवारों को मिलाकर प्रति परिवार पाँच सदस्य के मान से करीब 3.5 लाख लोगों अर्थात् प्रदेश की आधी आबादी नये स्वरूप में गेहूँ एक रुपये किलो तथा चावल 2 रुपये किलो के मूल्य पर उपलब्ध करवाया जा रहा है। पूरे प्रदेश में साथ ही एक रुपये किलो की दर से आयोडीनयुक्त नमक भी दिया जा रहा है। इसके अलावा सरकार ने इन परिवारों को रियायती दर पर साढ़े तेरह रुपये किलो के हिसाब से दी जाने वाली शक्कर की आपूर्ति को जारी रखने का निर्णय लिया है।

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मुख्यमंत्री कन्यादान योजना

इस योजना का उद्देश्य गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित/निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या/विधवा/ परित्याक्ता के विवाह के लिये आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। यह सहायता सामूहिक विवाह में ही दी जाती है। इसकी शर्त यह है कि कन्या ने विवाह की निर्धारित आयु पूरी कर ली हो। पूर्व में इसके तहत 6500 रूपये की सहायता कन्या की गृहस्थी की व्यवस्था के लिये तथा एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन के खर्चे र्की पूर्ति के लिये दी जाती थी। अब इस राशि को बढ़ाकर दस हजार रूपये कर दिया या है। इसमें नौ हजार रूपये कन्या की गृहस्थी के लिये और एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन खर्च के लिये है।

भारतीय समाज में कन्या के विवाह की चिन्ता हर गरीब परिवार में विशेष रूप से बहुत होती है। उनके पास अपने रोजमर्रा के खर्च की पूर्ति के लिये ही पर्याप्त पैसा नहीं होता , तो वे बेटी की शादी के लिये एक मुश्त खर्च जुटाने के लिये कर्ज का सहारा लेते है या कोई चीज बेचते हैं। गरीब परिवारों को इस समस्या से मुक्ति दिलाने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की विशेष पहल पर यह योजना शुरु की गई। इस योजना में सामूहिक विवाह किये जाते हैं जिससे आपसी सद्भाव भी बढ़ता है और शादियों पर अनावश्यक होने वाले खर्च पर भी रोक लगती है। इसकी एक विशेषता यह भी है कि इसका लाभ सभी समुदायों को मिलता है। ऐसे आयोजनों में हिन्दु और मुसलमान दोनों समुदायों के विवाह एक ही परिसर में होते हैं जिससे सम्प्रदायिक सद्भाव की भावना का विकास होता है।

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