स्वच्छ भारत

एक कदम स्वच्छता की और

भोपाल अपाहिज आश्रम

यह संस्था, जिसे भोपाल रियासत के तत्कालीन नवाब के आदेशों द्वारा मूलत: 1930 में आरंभ किया गया था, मोहताज खाना कहलाता था। शासन, नूर महल सड़क पर स्थित मुन्शी हुसैन खां की सराय में भिखारियों और अक्षम तथा निर्योग्य व्यक्तियों को आवास तथा भोजन और अन्य सभी सुविधाएं प्रदान करता था। सन् 1942 में उसका नाम बदल कर दरूल आमा (दरिद गृह) कर दिया गया।

सन् 1955 में इस संस्था का प्रबन्ध, भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक समिति को सौंप दिया गया। इस समिति ने सन् 1956 में अपाहिज आश्रम के रूप में पंजीयित संस्था की स्थिति में सुधार करने का बहुत प्रयास किया। उसने फरहत अफजा उद्यान में विस्तृत भूमि अर्जित की आश्रम की नई इमारत का निर्माण किया। यह आश्रम जाति या धर्म संबंधों कोई भेद-भाव बरते बिना निर्योग्य, अंधे तथा अन्य सभी अपंग और अक्षम बालकों को सभी सुविधाएं प्रदान करता है। संस्था में अन्तर्वासियों को निवाड़ बुनने, लिफाफे बनाने आदि जैसे शिल्पों में शिक्षा या प्रशिक्षण दिया जाता है।

इस आश्रम को राज्य शासन मध्यप्रदेश राज्य समाज कल्याण मण्डल, केन्द्रीय समाज कल्याण मण्डल तथा भोपाल नगरपालिका विभाग से सहायक अनुदान प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त, दान, सदस्यता, चन्दा, शिल्प वस्तुओं तथा उद्यान उत्पाद का विक्रय आगम, आश्रम के आय के स्रोत है।

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मुख्यमंत्री कन्यादान योजना

इस योजना का उद्देश्य गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित/निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या/विधवा/ परित्याक्ता के विवाह के लिये आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। यह सहायता सामूहिक विवाह में ही दी जाती है। इसकी शर्त यह है कि कन्या ने विवाह की निर्धारित आयु पूरी कर ली हो। पूर्व में इसके तहत 6500 रूपये की सहायता कन्या की गृहस्थी की व्यवस्था के लिये तथा एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन के खर्चे र्की पूर्ति के लिये दी जाती थी। अब इस राशि को बढ़ाकर दस हजार रूपये कर दिया या है। इसमें नौ हजार रूपये कन्या की गृहस्थी के लिये और एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन खर्च के लिये है।

भारतीय समाज में कन्या के विवाह की चिन्ता हर गरीब परिवार में विशेष रूप से बहुत होती है। उनके पास अपने रोजमर्रा के खर्च की पूर्ति के लिये ही पर्याप्त पैसा नहीं होता , तो वे बेटी की शादी के लिये एक मुश्त खर्च जुटाने के लिये कर्ज का सहारा लेते है या कोई चीज बेचते हैं। गरीब परिवारों को इस समस्या से मुक्ति दिलाने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की विशेष पहल पर यह योजना शुरु की गई। इस योजना में सामूहिक विवाह किये जाते हैं जिससे आपसी सद्भाव भी बढ़ता है और शादियों पर अनावश्यक होने वाले खर्च पर भी रोक लगती है। इसकी एक विशेषता यह भी है कि इसका लाभ सभी समुदायों को मिलता है। ऐसे आयोजनों में हिन्दु और मुसलमान दोनों समुदायों के विवाह एक ही परिसर में होते हैं जिससे सम्प्रदायिक सद्भाव की भावना का विकास होता है।

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