स्वच्छ भारत

एक कदम स्वच्छता की और

नवाब यार मोहम्मद खान 1726-1742

दोस्त मोहम्मद खान के 6 पुत्र एवं 5 पुत्रियाँ थीं। उसकी मृत्यु के समय सबसे बड़ा पुत्र यार मोहम्मद खां गद्दी का हकदार था पर वह हैदराबाद के निजाम के अधीन था। निजाम ने उसे इस्लामनगर की गद्दी का वारिस मान लिया परन्तु इस बीच सुल्तान मोहम्मद खां ने सरदार दोस्त मोहम्मद खान के भाई अकील मोहम्मद खां के सहयोग से नवाब बनने की घोषणा कर दी, पर भोपाल आकर यार मोहम्मद खान ने उसे गद्दी से उतार दिया एवं शासक बना।

यार मोहम्मद खां ने अपने साम्राज्य विस्तार के लिये कोटा, बूंदी तक धावे बोले और बहुत सा धन प्राप्त किया। अब रायसेन के किले को छोड़कर शेष रायसेन का समस्त क्षेत्र उसके अधीन था। उसने इस्लामनगर के महलों का पुनर्निर्माण कराया और आसपास के क्षेत्रों उदयपुरा, देवास और पठारी पर भी कब्जा किया। उसने इस्लामनगर से ही अपना शासन किया।

दिसम्बर 1735 ई. में मराठों ने अपने कुछ बचे धन की वसूली के लिये निजाम के अधीन सिरोंज पर हमला करके यार मोहम्मद से युध्द किया क्योंकि उस समय मराठों को धन की बहुत आवश्यकता थी इसलिये बाजीराव ने मालवा क्षेत्र पर आक्रमण कर दिया। काफी संघर्ष के बाद 1735 ई. में कुछ धन देने पर यार मोहम्मद एवं मराठों में सुलह हुई। 1737 ई. में निजाम की फौजें सिरोंज से वापस होने से पूर्व यार मोहम्मद खान ने मराठों से फिर दोस्ती की और बाकी धन अदा करने का आश्वासन देकर नवाब की रियासत की सुरक्षा करने का निवेदन किया। सन् 1738 में निजाम एवं भोपाल नवाब की सेनाओं ने मिलकर मराठों से युध्द किया पर 17 जनवरी 1738 में ये हार गये तब पेशवा ने भोपाल आकर कब्जा कर लिया। काफी संघर्ष के बाद मुआवजा देने की संधि पर यार मोहम्मद भोपाल के कुछ भाग पर शासन करने लगा।

कुछ वर्षों पश्चात् यार मोहम्मद खान ने पठारी को अपने राज्य में मिला लिया फिर सेवास (बेगमगंज) एवं उदयपुरा को भी अपने राज्य में मिलाया। यार मोहम्मद खान के सम्पूर्ण राजत्वकाल में उसका संघर्ष मराठों से होता रहा। उसने पुन: एक तीन वर्षीय संधि 1741 ई. में बालाजी बाजीराव से की। यार मोहम्मद खान की मृत्यु 1742 ई. में हुई एवं इस्लामनगर में इन्हें दफनाया गया। यार मोहम्मद के 5 पुत्र थे एवं चार पुत्रियाँ थीं।

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मुख्यमंत्री कन्यादान योजना

इस योजना का उद्देश्य गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित/निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या/विधवा/ परित्याक्ता के विवाह के लिये आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। यह सहायता सामूहिक विवाह में ही दी जाती है। इसकी शर्त यह है कि कन्या ने विवाह की निर्धारित आयु पूरी कर ली हो। पूर्व में इसके तहत 6500 रूपये की सहायता कन्या की गृहस्थी की व्यवस्था के लिये तथा एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन के खर्चे र्की पूर्ति के लिये दी जाती थी। अब इस राशि को बढ़ाकर दस हजार रूपये कर दिया या है। इसमें नौ हजार रूपये कन्या की गृहस्थी के लिये और एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन खर्च के लिये है।

भारतीय समाज में कन्या के विवाह की चिन्ता हर गरीब परिवार में विशेष रूप से बहुत होती है। उनके पास अपने रोजमर्रा के खर्च की पूर्ति के लिये ही पर्याप्त पैसा नहीं होता , तो वे बेटी की शादी के लिये एक मुश्त खर्च जुटाने के लिये कर्ज का सहारा लेते है या कोई चीज बेचते हैं। गरीब परिवारों को इस समस्या से मुक्ति दिलाने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की विशेष पहल पर यह योजना शुरु की गई। इस योजना में सामूहिक विवाह किये जाते हैं जिससे आपसी सद्भाव भी बढ़ता है और शादियों पर अनावश्यक होने वाले खर्च पर भी रोक लगती है। इसकी एक विशेषता यह भी है कि इसका लाभ सभी समुदायों को मिलता है। ऐसे आयोजनों में हिन्दु और मुसलमान दोनों समुदायों के विवाह एक ही परिसर में होते हैं जिससे सम्प्रदायिक सद्भाव की भावना का विकास होता है।

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