स्वच्छ भारत

एक कदम स्वच्छता की और

मध्यप्रदेश आदिवासी लोक कला परिषद्

वर्ष 1980 में प्रदेश की जनजातीय और लोक रूपंकर कलाओं, प्रदर्शनकारी कलाओं के संरक्षण, संवर्ध्दन, प्रोत्साहन एवं सम्मान की दृष्टि से जनजातीय और लोक कलाओं की राज्य अकादेमी के रूप में परिषद् की स्थापना की गयी है।

परिषद् अपने गठन काल से ही मध्यप्रदेश की जनजातियों और अनुसूचित जातियों के जनजीवन, कला, साहित्य और संस्कृति पर केन्द्रित गोण्ड, बैगा, भील, मुरिया, दण्डामी-माड़िया, सहरिया, कोल, कोरकू, भतरा, दोर्ला, पहाड़ी-कोरबा और उराँव जनजातियों तथा बसदेवा, देवार और सतनामी अनुसूचित जातियों का सर्वेक्षण एवं दस्तावेजीकरण एवं प्रकाशन का कार्य भी किया गया है। चौमासा इसका प्रतिष्ठित प्रकाशन है।

परिषद् ने रामकथा चित्र संकलन योजना के अंतर्गत अब तक बिहार की मधुबनी, उड़ीसा की पट्ट, पश्चिम बंगाल की पटुआ, आन्ध्रप्रदेश की कलमकारी और चेरियालपटम तथा महाराष्ट्र की चित्रकथा शैली में रामकथा के चित्र बनवाकर संकलित किये हैं, जो देश का अनूठा संग्रह है। परिषद् द्वारा आयोजित राष्ट्रीय रामलीला मेले के अवसर पर इनकी प्रदर्शनी भी लगायी जाती है।

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मुख्यमंत्री कन्यादान योजना

इस योजना का उद्देश्य गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित/निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या/विधवा/ परित्याक्ता के विवाह के लिये आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। यह सहायता सामूहिक विवाह में ही दी जाती है। इसकी शर्त यह है कि कन्या ने विवाह की निर्धारित आयु पूरी कर ली हो। पूर्व में इसके तहत 6500 रूपये की सहायता कन्या की गृहस्थी की व्यवस्था के लिये तथा एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन के खर्चे र्की पूर्ति के लिये दी जाती थी। अब इस राशि को बढ़ाकर दस हजार रूपये कर दिया या है। इसमें नौ हजार रूपये कन्या की गृहस्थी के लिये और एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन खर्च के लिये है।

भारतीय समाज में कन्या के विवाह की चिन्ता हर गरीब परिवार में विशेष रूप से बहुत होती है। उनके पास अपने रोजमर्रा के खर्च की पूर्ति के लिये ही पर्याप्त पैसा नहीं होता , तो वे बेटी की शादी के लिये एक मुश्त खर्च जुटाने के लिये कर्ज का सहारा लेते है या कोई चीज बेचते हैं। गरीब परिवारों को इस समस्या से मुक्ति दिलाने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की विशेष पहल पर यह योजना शुरु की गई। इस योजना में सामूहिक विवाह किये जाते हैं जिससे आपसी सद्भाव भी बढ़ता है और शादियों पर अनावश्यक होने वाले खर्च पर भी रोक लगती है। इसकी एक विशेषता यह भी है कि इसका लाभ सभी समुदायों को मिलता है। ऐसे आयोजनों में हिन्दु और मुसलमान दोनों समुदायों के विवाह एक ही परिसर में होते हैं जिससे सम्प्रदायिक सद्भाव की भावना का विकास होता है।

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